वराहपञ्चकम्

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    ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗
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👉🏻 प्रिय पाठकों-------

॥ वराहपञ्चकम् ॥

प्रह्लाद-ह्लादहेतुं सकलगुणगणं सच्चिदानन्दमात्रं सौह्यासह्योग्रमूर्तिं सदभयमरिशङ्खौ रमां बिभ्रतं च।
अंहस्संहारदक्षं विधिभवविहगेन्द्रेन्द्रादिवन्द्यं रक्षोवक्षोविदारोल्लसदमलदृशं नौमि लक्ष्मीनृसिंहम्॥१॥

वामाङ्कस्थ-धराकराञ्जलिपुट-प्रेमाति-हृष्टान्तरं सीमातीतगुणं फणीन्द्रफणगं श्रीमान्य-पादांबुजम्।
कामाद्याकरचक्र-शङ्खसुवरोद्धामाभयोद्यत्करं सामादीड्य-वराहरूपममलं हे मानसेमं स्मर॥२॥

कोलाय लसदाकल्प-जालाय वनमालिने।
नीलाय निजभक्तौघ-पालाय हरये नमः॥३॥

धात्रीं शुभगुणपात्रीमादाय अशेषविबुधमोदय।
शेषेतमिमदोषे धातुं हातुं च शंकिनं शंके॥४॥

नमोऽस्तु हरये युक्ति गिरये निर्जितारये।
समस्त-गुरवे कल्पतरवे परवेदिनाम्॥५॥ ॥

इति श्रीवादिराजयति-कृतं वराहपञ्चकं संपूर्णम्।
                                       सम्पूर्ण---🖌
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