।। सावित्री साधना प्रयोग:।।
।।सावित्री साधना प्रयोग:।।
मंत्र--
ॐभगवति सावित्रि कं खं घं ड़ं लं तं थं दं धं नं रं क्लीं स्वाहा।
इस मंत्र के २४ लाख जप ३ वर्ष नें पूर्ण करे तो वाक सिद्धि प्राप्त होवें।
।।गायत्री सावित्री समष्टि मंत्र साधन ।।
मंत्र--
ॐ ह्रौं ह्रीं ऐं ईं तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गोदेवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् वेदगर्भें भगवती स्वाहा ।
यह मंत्र दैन्य ,दुरित का क्षय कर सौभाग्य मे वृद्धि करता है । विधा एवं विवेक प्रदान करता है । त्रिपुर सुंदरी कि ध्यान करते हुए उसके त्रिनेत्रों का अलग अलग वर्ण का ध्यान करे। एक नेत्र सोनभद्र नदी ये जलकी तरह लाल , दुसरा नेत्र गंगाजल के समान धवल, तीसरा यमुना जल ये समान श्याम वर्ण का है नित्य १००८ बार जप करें
।।विलोम गायत्री साधना ।।
मंत्र--
ॐ भू भव: स्व:तयादचोप्र नः यो योनि हिमधी स्यवदेर्गोभ ण्यंरेर्वतुविस तत स्व: भव: भू ॐ।
विलोम मंत्र अग्नि को समान कार्य करता है । मारण प्रयोगों मे भी कार्य करता है । ईष्ट मंत्र सिद्ध नही हो रहा हो तो लोम गायत्री मंत्र पश्चात पुन: विलोम गायत्री शीघ्र सिद्धि प्रदा होती। ( किसी भी मंत्र के आगे लोमगायत्री तथा मंत्र के बाद विलोम गायत्री मंत्र लगाकर इस तरह तीन मंत्रों का एक ही मंत्र बनेगा) जप करने से वह मंत्र शीघ्र कार्य करता है ।
।।वाग्वादिनी सावित्री प्रयोग ।।
मंत्र--
ॐ ऐं त्रिपुरे देवि विग्रहे ऐं कामेश्वरी धीमहि ऐं तन्नो प्रचोदयात् ।
यह त्रिपुरसुदंरी गायत्री मंत्र है जिसको,, ऐं ,, बीज से भिन्न पाद मंत्र बनाने से यह सरस्वती प्रधान मंत्र हो गया है ।
यह मंत्र विधा बुद्धि देता है तभी सम मोहन मे भी कार्य करता है ।
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