गर्भ-स्तम्भन
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❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗
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सिद्ध उपाय
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👉🏻 प्रिय पाठकों-------
गर्भ-स्तम्भन
मन्त्रः- “शुद्ध बुद्ध को ठकुरा बाँधो, गर्भ रहे जी ठहर पाके फूटे बीज गिरे । श्री रामचन्द्र जी, हत्या तोहे परे । ईश्वर तेरी साख, गौरा गाँडा बाँध के नौ महीना राख । ताला झिन्ना न झरै, पट-पट बीधे ताल । लोहू जामुन दे गए, ब्रह्मा और मुरार । ऊँचे चढ़े न नीचे धँसे, धँसे तो महा-देव की जटन में परै । इतनी चुकरियाँ अमृत की भरीं, सो सीता के अङ्ग: धरीं । राख कोख लक्ष्मण जती, नौ महीना के बाद लक्ष्मणकुमार की आन । विष्णु की आन, राजा वासुकि की आन ।।”
विधि – पहले दीपावली में १०८ होम धी-गुगल के देकर जगाए । फिर काले धागे का गण्डा बनाकर गर्भिणी को गले या कमर में पहनाएँ, तो गर्भ स्थिर रहे । बच्चा होने पर उतार दें । सम्पूर्ण---🖌
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*🙆🏼♂‼जय श्री अवंतिकानाथ‼🙆🏼♂*
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